टैली के 28 ग्रुप्स के बारे में विस्तृत जानकारी
टैली में कुल 28 ग्रुप्स होते हैं, जिन्हें दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. प्राइमरी ग्रुप्स:
ये मुख्य कैटेगरी हैं जिनके अंतर्गत अन्य ग्रुप्स आते हैं। इनका उपयोग आपके व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं को वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है।
* कैपिटल अकाउंट: मालिक की पूंजी को दर्शाता है।
* रिजर्व्स एंड सरप्लस: कंपनी के लाभ को दर्शाता है जिसे भविष्य के लिए रखा गया है।
* करंट एसेट्स: वे संपत्ति जो एक वर्ष के भीतर नकदी में परिवर्तित हो सकती हैं, जैसे कि स्टॉक, देनदार आदि।
* करंट लायबिलिटीज: वे देनदारियां जो एक वर्ष के भीतर चुकाई जानी होती हैं, जैसे कि क्रेडिटर, बैंक ओवरड्राफ्ट आदि।
* इन्वेस्टमेंट्स: कंपनी द्वारा किए गए निवेश।
* लोन्स (लायबिलिटी): कंपनी द्वारा लिए गए ऋण।
* फिक्स्ड एसेट्स: वे संपत्ति जो लंबे समय तक उपयोग की जाती हैं, जैसे कि भवन, मशीनरी आदि।
* मिसलेनियस एक्सपेंसेस (एसेट): वे व्यय जो किसी विशेष श्रेणी में नहीं आते।
* सस्पेंस अकाउंट: अस्थायी अकाउंट जो तब तक उपयोग किया जाता है जब तक कि लेनदेन का सही अकाउंट पता नहीं चल जाता।
* डायरेक्ट इनकम्स: सीधे बिक्री से प्राप्त आय।
* डायरेक्ट एक्सपेंसेस: सीधे बिक्री से संबंधित व्यय।
* इंडायरेक्ट इनकम्स: अन्य स्रोतों से प्राप्त आय।
* इंडायरेक्ट एक्सपेंसेस: अन्य व्यय जो सीधे बिक्री से संबंधित नहीं हैं।
* परचेज अकाउंट्स: खरीद से संबंधित सभी लेनदेन।
* सेल्स अकाउंट्स: बिक्री से संबंधित सभी लेनदेन।
2. सब-ग्रुप्स:
ये प्राइमरी ग्रुप्स के अंतर्गत आते हैं और अधिक विशिष्ट प्रकार के अकाउंट्स को दर्शाते हैं। कुछ उदाहरण हैं:
* बैंक अकाउंट्स: विभिन्न प्रकार के बैंक खातों जैसे कि चालू खाता, बचत खाता आदि।
* कैश इन हैंड: हाथ में रखी नकदी।
* डिपॉजिट्स (एसेट): जमा किए गए धन।
* लॉन्स एंड एडवांसेस (एसेट): दिए गए ऋण और अग्रिम।
* स्टॉक इन हैंड: स्टॉक में मौजूद माल।
* संड्री क्रेडिटर्स: विभिन्न क्रेडिटरों को देय राशि।
* संड्री डेब्टर्स: विभिन्न देनदारों से प्राप्त होने वाली राशि।
ये सभी ग्रुप्स आपके व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को समझने और प्रबंधित करने में मदद करते हैं।
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